जय बाबा की,
पित्रपक्ष में अपने पूर्वजों की तिथि अनुसार श्राद्ध कर्म अवश्य करें। पूरे 15 दिन पूरी शुद्धता, श्रद्धा और सात्विकता अपनाए। और पित्रपक्ष के बाद अमावस्या को उन्हें पूरी श्रद्धा से विदा करें।
जय बाबा की।।
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