Friday, October 7, 2022

पित्रपक्ष और आप

 जय बाबा की, 

पित्रपक्ष में अपने पूर्वजों की तिथि अनुसार श्राद्ध कर्म अवश्य करें। पूरे 15 दिन पूरी शुद्धता, श्रद्धा और सात्विकता अपनाए। और पित्रपक्ष के बाद अमावस्या को उन्हें पूरी श्रद्धा से विदा करें।

जय बाबा की।।

रिश्ते में मिली हुई संपत्ति का क्या करें

 जय बाबा की 

अपने पूर्वजों की या किसी की भी संपत्ति आपको मिली होती है, उनकी मुक्ति का दायित्व भी आपका बनता है। जब तक उनकी मुक्ति नही होती आप रोग, कष्ट और तमाम प्रकार की परेशानियों को भोगने के लिए मजबूर होते हैं। ऐसा मेरे पूज्य गुरूदेव द्वारा बताया गया था। उसके बाद मैने इस सूत्र को जितनी जगह एप्लाई किया। शतप्रतिशत परिणाम आया। अभी कल ही एक फोन आया उनकी कुंडली से पता लग रहा था कि उनको अपने पूर्वजों के अतिरिक्त भी कहीं से संपत्ति मिली है। मैंने उनसे पूछा कि जिसकी संपत्ति आपको मिली है उनकी मुक्ति के लिए आपने क्या किया बोले उनकी तिथि अनुसार वर्ष में एक बार श्राद्ध खिला देता हूं। श्राद्ध तो आप उनको खिलाते हो जिसने तुम्हें अपना उत्तराधिकारी बनाया है उनके पूर्वजों के लिए क्या किया। यह बताओ तो बोले उनसे हमें क्या मतलब? 

मतलब बहुत बड़ा होता है। ऐसे ही लोग जीवन भर पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे जैसे डाक्टर, वकील, ज्योतिषियों, पंडित, पुरोहितों की बैलेंस शीट  को बढाते रहते हैं। और परेशानियों और कष्टों से राहत तो पाते हैं मुक्ति नहीं। सभी से मुक्ति तभी संभव है जब आप अपने और यदि किसी की संपत्ति चाहे वह एक रुपया या एक हजार करोड़ मिला है। देने वाले के सहित उसके पूर्वजों की मुक्ति नही कराते कष्टों से पार नही पा सकते हैं। शेष फिर कभी आज के लिए इतना ज्ञान बहुत है। 

जय बाबा की

जेनेटिकरोग क्यों होते हैं, कारण और निवारण

 #जेनेटिकरोग

 जय बाबा की

हमारे पूज्य गुरूदेव बताते हैं कि आपके परिवार में आपके पूर्वज जिस भी गंभीर या ताउम्र चलने वाले रोगों से पीड़ित रहे हैं, और वही रोग या कष्ट आपको भी हैं तो सावधान रहिए दुनिया का कोई भी डाक्टर, वैध, हकीम, पंडित, पूजापाठ आपको वह कष्ट होने से रोक नहीं सकता। मेडिकल भाषा में इन्हें जेनेटिक रोग कहते हैं। यह कई प्रकार से होते  हैं। दुर्घटना या एक्सीडेंट भी पूर्वजों की वजह से या उनकी स्मृतियो की वजह से ही होते हैं। जितने खतरनाक पूर्वज होते हैं उनकी स्मृतियां भी उतनी ही खतरनाक होती हैं। जैसे- किसी के परिवार में कोई पूर्वज मानसिक रोगी रहा है तो आपके परिवार में भी कोई न कोई दिमागी कमजोर होगा, यदि आपके परिवार में किसी का ह्रदय कमजोर रहा है या हार्ट पेसेंट रहा है तो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता ही रहेगा। परिवार में यदि कोई कैंसर रोगी है तो  वह भी रिपीट, होता रहेगा। कहने का मतलब है आत्मा तो प्योर है। अजर है अमर है। हमें लगता है हमारे घर में यह रोगी थे मर गए। मुक्त हो गए। नहीं मुक्त नहीं हुए। वह अब अपने परिवार के डीएनए में फैल गए।अब जिसके ग्रह नक्षत्र कमजोर होंगे उन्हीं पर अटैक करेंगे। और फिर अब आप डाक्टर अस्पताल के चक्कर लगाते रहिए।

जय बाबा की